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Diya Sain is India's one of the best Indian Women Kushti wrestler of present day, scoring 80 medals till date. She is from a family of wrestlers. Her father Suraj Pahalwan and Grand father Sh. Rajinder Singh of Village Purbalian, District Mujaffar Nagar Uttar Pardesh , were also very fine wrestlers of their time. Suraj Pahlwan wanted to make his son Dev Sain a good wrestler. Divya followed on the footsteps of her brother at a very young age . Although from a fortune less family , she went on to become a champion in India.

Thursday, December 28, 2017

​​महिला पहलवान दिव्या सैन को नहीं मिला प्रो रेसलिंग लीग में मौका।



​​महिला पहलवान दिव्या सैन को नहीं मिला प्रो रेसलिंग लीग में मौका। कुश्ती कला में शिखर की ओर अग्रसर दिव्या सैन आज भारत वर्ष की एक बेहतरीन महिला पहलवानो में हैं । दिव्या सैन , गाँव पुरबालियान , जिला मुज्जफर नगर , उत्तर प्रदेश निवासी सूरज पहलवान की बेटी हैं। दिव्या सैन ने महज आठ साल की उम्र से ही अखाडा गुरु राजकुमार गोस्वामी व् बाद में अखाडा गुरु प्रेमनाथ में कुश्ती कला में निपुणता हासिल की। दिव्या सैन ने कुश्ती में कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। उन्होंने मिटटी , मैट के दंगलों में , महिला ही नहीं पुरुष पहलवानो को भी चित कर कुश्तियां जीती हैं । दिव्या की सफलताएं इस प्रकार हैं।

कामनवेल्थ चैंपियनशिप - 1 गोल्ड मैडल। एशिया चैंपियनशिप - 1 गोल्ड , 2 सिल्वर , 2 ब्रोंज पदक। ( सब जूनियर , जूनियर व् सीनियर ) वर्ल्ड चैंपियनशिप - पाँचवाँ स्थान। ( सब जूनियर) सीनियर नेशनल गेम्स - 1 ब्रोंज मैडल नेशनल चैंपियनशिप - 11 गोल्ड , 2 सिल्वर , 2 ब्रोंज. सब जूनियर , जूनियर व् सीनियर ) दिल्ली स्टेट चैंपियनशिप - 17 गोल्ड मैडल ( स्कूल सब जूनियर , जूनियर व् सीनियर ) उत्तर प्रदेश स्टेट चैंपियनशिप - 2 गोल्ड मैडल इण्टर यूनिवर्सिटी - 3 गोल्ड मैडल चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी - 3 गोल्ड मैडल केसरी के खिताब - 6 बार भारत केसरी , 1 राजस्थान केसरी , 1 महारानी किशोरी , 2 उत्तर प्रदेश केसरी , 1 जम्मू कश्मीर प्रदेश केसरी। दिल्ली ओलिंपिक गेम्स - 1 गोल्ड मैडल राजीव गांधी गोल्ड कप - 1 सिल्वर मैडल चन्दगी राम गोल्ड कप - 1 सिल्वर , 2 ब्रोंज। कुल पदकों की संख्या - 62 कामनवेल्थ चैंपियनशिप - 1 गोल्ड मैडल।

यदि किसी भी कसौटी पर पहलवान दिव्या सैन को जांचा जाय तो वह देश के शीर्ष पहलवानो में अपना स्थान बनाये हुए हैं। भारत केसरी का ख़िताब जीतना भी मायने रखता हैं , साथ ही सैकड़ों हजारों लोगो की भीड़ में पुरुष पहलवानो से लोहा लेना अपने आप में एक अनोखी बात ही कही जायेगी। इसी वर्ष जून में 55th डान कोलोव एवं निकिता पेत्रोव इंटरनेशनल कम्पटीशन बुल्गारिया में हुआ था जिसमे भारत के 28 पहलवानो ने भाग लिया। ग्रीको रोमन , फ्रीस्टाइल व् महिला फ्रीस्टाइल तीनो वर्ग में ये कम्पटीशन हुआ। जिसमे बजरंग पुनिया पहलवान का सिल्वर मैडल , ऋतू फोगट ब्रोंज मैडल तथा दिव्या सैन ब्रोंज मैडल लेकर देश का नाम ऊंचा किया।

जिस दिन प्रो रेसलिंग लीग के ऑक्शन हुए , उसके रिजल्ट में पहलवान दिव्या सैन का नाम न देखकर मुझे बहुत दुःख हुआ। पहलवान दिव्या सैन क्यों प्रो रेसलिंग लीग में खेलने की हकदार बनती हैं इस बाबत मैंने अपनी फेसबुक लाइव फीड और यूट्यूब चैनल पर भी बोला। आप भी देख सकते हैं।

​इस महिला पहलवान के जीवन पर यूँ तो बहुत कुछ लिखा , बोला जा चूका हैं। लेकिन संक्षेप में आपको बता दूँ की दिव्या एक गरीब परिवार से हैं। जो नाई ( सैन समाज ) बिरादरी से ताल्लुक रखती हैं। और ये तो सब जानते ही हैं की किस तरह उसके पिता ने लंगोट बेचकर अपनी बेटी को पहलवान बनाया। दिव्या के बारे में स्वयं नेता जी माननीय सांसद व् भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष श्री ब्रजभूषण शरण सिंह जी ​ने भी आम जनमानस को बताया , ताकि कुश्ती के खेल में और बेटियां भी आएं और भले ही वे गरीब हों , दिव्या की तरह नेशनल चैंपियन बने। लेकिन दुःख तब होता हैं जब कुछ लोगों को ये रास नहीं आता। वो किसी भी तरह से आगे बढ़ती हुई इस पहलवान के रास्ते में रोड़े अटकाने से जरा भी नहीं चूकते। अब सवाल यह हैं की अगर इस तरह हिन्दुस्तान में गरीब और निचले तबके से आ रहे खिलाडियों के साथ दुर्भावना पूर्ण व्यवहार होता रहेगा तो कैसे खिलाडी आगे निकलेंगे , उनके माता पिता कैसे अपने बच्चों को खेलने भेजेंगे ?

आज के युग में द्रोणाचार्य नहीं दुर्योधन की जरूरत है। महाभारत काल से आज तक न जाने कितने द्रोणाचार्यों ने अनेकों अनेक एकलव्यों का अंगूठा लेकर उनकी प्रतिभा का गला घोंट दिया। अनेकों अनेक कर्ण सरीखे धुरंधर प्रतिभा के धनियों को अवसरों से वंचित कर दिया। अगर खोजें तो एक लम्बी लिस्ट निकलेगी। लेकिन एक दुर्योधन ही था जो कर्ण के पक्ष में खड़ा हुआ था । उसने एक सूत पुत्र को राज सिंहासन देकर अपना मित्र बनाया और अपनी प्रतिभा को दर्शाने का मौका दिया था । मुझे ये लिखते हुए दुःख तो होता हैं लेकिन सच में आज दुर्योधन सरीखे उन प्रतिभाओं का सम्मान करने वाले , उन्हें मौका देने वाले मित्रों की कमी जरूर खलती हैं।

BJJ Scout: Divya Sain Fireman's Carry Highlight/Study

This is study of wrestler divya sain's techniques during her stint in Dangal or mat wrestling competitions

Tuesday, November 21, 2017

One India covers Divya Kakran's Sr. National Gold Medal


राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में दिव्या काकरान ने 68 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता.

जब पहलवानों के कपड़े बेचने वाले पिता के गले में डाला बेटी ने गोल्ड मेडल राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में दिव्या कारान ने 68 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता.



इंदौर : दिव्या काकरान भारतीय कुशती में नया नाम नहीं है. वह एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीत चुकी है. लेकिन राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में अभी तक गोल्ड नहीं जीता था. लेकिन खास बात यह है कि उसकी साधारण पृष्ठभूमि के रहते वह गोल्ड मेडल जीत सकी. यह बात सामने आई मध्यप्रदेश के इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप के दौरान.

 यह कुछ कुछ फिल्मी अंदाज में ही हो गया जब 19 साल की दिव्या ने 68 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीत कर बाहर की दौड़ लगा दी तो किसी को समझ ही नहीं आया कि दिव्या कहां जा रही है.




लेकिन दिव्या सीधे पहुची बाहर लगे एक स्टॉल में जहां पहलवानों के कपड़े बिक रहे थे तब तक किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा है. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता. दिव्या ने अपना जीता हुआ मेडल पहलवानों के कपड़े बेचने वाले व्यक्ति के गले डाल दिया जो उसके पिता थे.
ऐसा भावुक पल केवल फिल्मों ही देखा जाता है लेकिन यह हकीकत में हुआ कि अंदर बेटी कुश्ती का फाइनल मैच खेल रही थी और बाहर पिता उसकी मां के सिले हुए पहलवानों के कपड़े बेच रहे थे.



इसी घटना ने सभी को ध्यान खींचा दिव्या की साधारण पृष्ठभूमि पर लेकिन उस वक्त माहौल जश्न का था हो भी क्यों न, यह दिव्या का पहला गोल्ड मेडल जो था राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में.  हालांकि जुलाई में ही उसने एशियन चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था लेकिन यह मेडल और मौका दिव्या के लिए कुछ ज्यादा ही खास बन पड़ा था.
दिव्या की पहलवानी से चलता किसी तरह घर
दिव्या दिल्ली की रहने वाली है. उसकी मां पहलवानों के लिए कपड़े सिलती हैं और वे कपड़े उसके पिता सूरज काकरान बेचते हैं. घर की स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन दिव्या चाहती है कि उसकी पहलवानी से वह घर की आजीविका में खासा  योगदान दे जो हो नहीं पाता है.
हालांकि पिता सूरज का कहना है कि अभी उनका गुजारा दिव्या की कमाई से ही चल पा रहा है शायद यही वजह रही कि उसने इस चैम्पियनशिप में वह उत्तर प्रदेश की ओर से खेलने का फैसला किया  क्योंकि उत्तर प्रदेश में चैम्पियन पहलवानों को अच्छी ईनामी राशि दी जाती है.
दिव्या 10 साल की उम्र से ही लड़कों के साथ पहलवानी में मुकाबला कर रही है. पहले बड़ी मुश्किल से एक लड़का मुकाबले के लिए तैयार हुआ था उसके पिता ने कहा था कि अगर वह लड़के को हरा देती है तो उसे पांच सौ रुपये ईनाम में मिलेंगे. लड़का काफी अच्छा पहलवान था लेकिन दिव्या ने पांच सौ रुपये जीत लिए और आज तक उसने उसे सम्भाल कर रखा है. पांच सौ रुपये की इस जीत के साथ ही दिव्या ने तय कर लिया था कि अब करियर कुश्ती में ही बनेगा.




Semifinal Bout - Sr. National Women - indore 2017 Divya Sain vs Navjot


Navjot is an experienced wrestler working for Railways. while Divya is fighting in the sr. Nationals for the first time. The match was a hardcore example of wrestling competition. The match ended a draw in the end , it tied up at 5-5 equal points, to both the wrestlers. The crowed couldn't tell the winner among the wrestlers. The match however went in the favour of Divya sain, becuase she has scored a double point, while Navjot secured all single points.

उत्तर प्रदेश केसरी - दिव्या पहलवान।


उत्तर प्रदेश केसरी - दिव्या पहलवान।

आज का दिन उत्तरप्रदेश की इस बेटी के नाम रहेगा ये कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी । अपने प्रतिद्वंदी को बाई फाल चित्त कर दिव्या ने उत्तर प्रदेश केसरी को जो खिताब आज अपने नाम किया वो वाकई काबिले तारीफ हैं। आप ने प्राथमिक कक्षाओं में जरूर पढ़ा होगा की हीरा कार्बन का अपररूप हैं। लेकिन घने , भतेरे दबाव के बाद ही कार्बन अर्थात कोयला हीरे की शक्ल लेता हैं। दिव्या को कोयले से हीरा बनने में कितना दबाव झेलना पड़ा होगा इसकी कहानी फिर कभी , लेकिन आज इस हीरे की चमक पूरे उत्तर प्रदेश को दिखाई पड़ी ये आज के दिन का इतिहास है । अनायास ही उत्तर प्रदेश की झोली में आ पड़े इस हीरे की चमक उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्य मंत्री जी योगी जी आदित्यनाथ भी जरूर देखें और अपने प्रदेश की इस बेटी के लिए जरूर दो शब्द कहें ये मेरी दिली इच्छा हैं। दिव्या अब वर्ल्ड चैंपियन बनने को आतुर हैं , और पोलैंड में विश्व चैंपियन बनने के लिए अपनी दावेदारी पेश करेगी। देश प्रदेश के खेल प्रेमियों से प्रार्थना हैं की दिव्या के लिए शुभकामनाएं भेजें। इस महिला पहलवान में दम है। मैं पिछले कई वर्षों से कह रहा हूँ की ये एक दिन ओलिंपिक खेलगी ही नहीं पूरे मैडल जीत कर पूरे भारतवासियों को गर्व की अनुभूति कराएगी।

Thanks, Pahalwan ji ( Deepak Ansuia Prasad Bhardwaj)

Junior National Gold - final match 69kg Divya vs Naina Rohtak



Naina is a bharat kesari wrestler, defeating Naina is not an easy task, this video is one of the best way, we can see Divya fighting and winning.

Divya in Cadet Asian Semifinals - wins from Japanese Girl

In 2015 Divya fought for Cadet Asian Championship for the first time. It is not easy to fight with Japanese Girls , they are more experienced and more agile. fighting and defeating the girl in semifinal was not an easy task.

 

Men vs Women : Divya Sain fights with Anuj Thakur

Indian Express explores Divya's fight with her male challangers
In this video ( shot in the month of November 26 at a village of Meerut, ) Women wrestler Divya sain fights with her male opponent, who is stronger than her, but it is the sheer skills and techniques of the girl , which helped her pin her opponent and won the match. This match was also witnessed by a local daily newspaper who are writing a story on her , and want to witness her fights with male wrestlers by their own eyes,
I am really very sorry to say that Indian mainline newspapers have doubts in their conscience , and want to clear it .

 

Monday, October 16, 2017

​दिल्ली छोड़ रही प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ खिलाडी महिला पहलवान


​दिल्ली छोड़ रही प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ खिलाडी महिला पहलवान।


दिल्ली स्टेट में दिव्या सैन के लगातार 17 गोल्ड मैडल ये बताने के लिए काफी हैं की दिव्या सैन प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ खिलाडी और महिला पहलवानो में से एक हैं। दिव्या सैन ने प्रदेश ही नहीं राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुल मिलाकर 55 मैडल लिए और प्रदेश का नाम ऊँचा किया। इसे प्रदेश का ही दुर्भाग्य माना जाएगा की इस बेहतरीन खिलाडी को दिल्ली की तरफ से कभी कोई प्रोत्साहन नहीं मिल पाया। एक तरफ हरयाणा जैसे प्रदेश हैं जिन्होंने अपने खिलाडियों के लिए "मैडल लाओ नौकरी पाओ" की नीति अपना रखी है , वहीँ दिल्ली की इस महिला खिलाडी के खाते में न तो कोई नौकरी ही हैं न कोई स्पॉन्सरशिप या वजीफा । क्या इस खिलाडी का एकमात्र दोष दिल्ली की तरफ से खेलना ही हैं ? भारत के लिए ओलिंपिक पदक लाने का सपना देख रही ये महिला पहलवान सपोर्ट के लिए अपने परिवार की माली हालत पर ही निर्भर हैं। दिव्या को भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष व् दिल्ली से सांसद श्री मनोज तिवारी ने तो एक बार दो लाख रूपये की एक मुश्त मदद जरूर की लेकिन क्या केवल ये ही इस खिलाडी के लिए काफी हैं ?​ हर नयी आने वाली बॉलीवुड मूवी का ट्विटर पर समीक्षा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री​ श्री​ अरविन्द केजरीवाल तो प्रशंशा के दो शब्द भी ​कभी ​ट्विटर​​ ​​पर तक न लिख पाए।​ क्या दिव्या सैन का हक नहीं बनता की उन्हें एक सम्मानजनक नौकरी देकर , देश के ​लिए ​सम्मान बटोरने दिया जाय ?



दिव्या सैन की इस हालात से भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष व् सांसद माननीय ब्रजभूषण जी भी अनजान नहीं हैं। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्य मंत्री श्री योगी आदित्य नाथ जी ने प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं , इसी के मद्दे नजर कुश्ती संघ के अध्यक्ष व् सांसद माननीय ब्रजभूषण जी​ ने दिव्या सैन को उत्तर प्रदेश से खेलने के लिए सुझाव दिए हैं। जिस पर दिव्या सैन ने विचार किया और ये तय किया की ​वह अब ​उत्तरप्रदेश ​से ही खेलेंगी ​।

महिला पहलवान दिव्या सैन का सीनियर ​रेसलिंग ​वर्ल्ड चैंपियन शिप ​​2017 के लिए हुआ सिलेक्शन।

​​महिला पहलवान दिव्या सैन का सीनियर ​रेसलिंग ​वर्ल्ड चैंपियन शिप ​​2017 के लिए हुआ सिलेक्शन।
इस वर्ष 2017 की सीनियर​ रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप 21 -26 नवम्बर​ तक ​ पोलैंड में होनी हैं।​ इस चैंपियनशिप में ​भाग लेने के लिए भारतीय कुश्ती संघ द्वारा खिलाडियों के चयन के लिए एक ट्रायल प्रतियोगिता , लखनऊ के साई सेंटर में आयोजित की गई। जिसमे महिला पहलवान दिव्या सैन ने क्वालीफाई किया। दिव्या सैन अब 69 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। पहलवान को बहुत बहुत बधाई।

Sunday, February 5, 2017

MTV- Sunsilk Angles of Rock- episode 11 - Divya Sain

MTV has gathered distinguished women personalities together, they meet each other and explore their respective world.
Find out how they feel when they meet the Dangal Queen, Divya Sain, 
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The Quint : The extensive and exclusive on Divya Sain,

The editors and officials of Delhi chapter of The Quint happens to be my friends. I know that they are dedicated, hard working professionals. When they told me their desire to cover , and make a story out of  Divya's wrestling stories , I was happy for Divya. I told Suraj Pahlwan to help them as much as possible. And that is where from , this story begins, rest is before you.

Watch one of the best work by The Quint.


काफी समय से मैं और "द क्विंट" न्यूज़ वेबसाइट के दिल्ली अध्याय के एडिटर व् ऑफिसियल्स मेरे मित्र रहे हैं।  जब उन्होंने मुझे बताया की उनकी इच्छा हैं की वे महिला पहलवान दिव्या सैन की कुश्ती से जुडी कहानियों पर एक कहानी बनाना चाहते हैं , तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई।  हम लोग सूरज पहलवान से मिले।  सूरज पहलवान मेरे अच्छे मित्र हैं , मैंने सूरज पहलवान से कहा की इन्हें यथा संभव सहायता व् सहयोग किया जाय।

 और इस प्रकार दिव्या सैन पर इस वर्ष की यह बेहतरीन कहानी फिल्माई गई।  इसमें कुछ दृश्य मेरे यूट्यूब चैनल से लिए गए हैं।  जिन्हें मैंने निस्वार्थ इजाजत दी हैं।  "